हर इंसान ज़िंदगी में कभी न कभी ऐसे लोगों से मिलता है जो साथ तब तक निभाते हैं, जब तक उनका काम चलता है। ऐसे अनुभव दिल को गहरी चोट देते हैं, पर वही हमें सच्चे और झूठे रिश्तों का फ़र्क़ भी सिखाते हैं। इस लेख में मतलबी लोग, मतलबी दोस्त, रिश्तेदार और पैसों की दुनिया पर दिल को छू लेने वाली मौलिक शायरी और कोट्स हैं, जिन्हें आप अपने जज़्बात बयां करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
Matlabi Log Shayari

मतलबी लोगों की पहचान अक्सर तब होती है जब हमारे पास देने के लिए कुछ नहीं बचता। वे मुस्कुराहट के पीछे अपना फ़ायदा छिपाकर रखते हैं और जैसे ही काम निकलता है, रास्ता बदल लेते हैं। ऐसे लोगों से मिला दर्द हमें समझदार बनाता है। हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती और हर मीठी बात सच्ची नहीं होती। ये शायरी उन्हीं चेहरों के नाम है जो नक़ाब पहनकर हमारी ज़िंदगी में आए और नक़ाब उतारकर चले गए।
- मतलबी लोग वक़्त से नहीं, ज़रूरत से रिश्ता रखते हैं।
- जिनके चेहरे पर मुस्कान थी, उनके दिल में हिसाब चल रहा था।
- नक़ाब कितना भी महँगा हो, एक दिन उतर ही जाता है।
- काम निकलते ही उनकी आँखें पहचानना भूल गईं।
- मीठी बातों का मोल तब समझ आया जब कड़वा सच सामने आया।
- जो हर बार फ़ायदा देखकर आए, वो साथी नहीं, सौदागर थे।
- उन्होंने हाथ थामा था, सहारे के लिए नहीं, सीढ़ी बनाने के लिए।
- मतलबी इंसान की दोस्ती गर्मी की बारिश जैसी होती है, पल भर की।
- जिन्हें मैंने अपना समझा, वो मेरी ज़रूरत का हिसाब रखते थे।
- भीड़ में अपनों को ढूँढा, पर मतलब वाले ही मिले।
- उनकी तारीफ़ में भी एक सौदा छिपा था।
- जो सिर्फ़ मौक़े पर मिलते हैं, वो मौक़ापरस्त कहलाते हैं।
- दिल दिया था उन्हें, उन्होंने इसे बस इस्तेमाल का सामान समझा।
- जिनकी मुस्कान में भी मक़सद हो, उनसे दूरी ही भली।
- अब हर मुलाक़ात से पहले दिल पूछता है, इस बार क्या चाहिए इन्हें?
- सच्चे लोग कम मिलते हैं, मतलबी लोग हर मोड़ पर खड़े हैं।
- उन्होंने रिश्ता निभाया नहीं, बस भुनाया।
- जिनके लिए हम सब कुछ थे, उनके लिए हम कुछ भी नहीं रहे।
- मतलबी लोग खुशियों में हाज़िर और दुख में ग़ायब होते हैं।
- इस दौर में सबसे महँगा तोहफ़ा बेग़रज़ इंसान है।
- उनकी हमदर्दी की क़ीमत तब पता चली जब बिल सामने आया।
- जो तुमसे मिलकर तुम्हारा नहीं, तुम्हारे काम का हुआ, उसे दोस्त मत कहना।
- आईना झूठ नहीं बोलता, पर कुछ लोग आईने से भी चालाक निकले।
- जिसने मेरा वक़्त लिया, उसने कभी अपना वक़्त नहीं दिया।
- मतलबी लोग रिश्तों की किताब में सिर्फ़ फ़ायदे वाले पन्ने पढ़ते हैं।
- मैं सादगी में जीता रहा, वो चालाकी में जीतते रहे।
- जो आज साथ हँसा, कल वही मेरे आँसुओं पर चुप निकला।
- बहुत मुश्किल है उसे पढ़ना जिसकी हर बात में मतलब छिपा हो।
- उनके वादे काग़ज़ की नाव थे, ज़रा सी लहर में डूब गए।
- मैंने भरोसा किया था, उन्होंने उसे सीढ़ी बनाया।
- कुछ लोग रिश्ते नहीं निभाते, बस अवसर तलाशते हैं।
- वो पास तभी आए जब मेरी जेब में उनका काम था।
- जो बिना मतलब के हाल पूछ ले, वो आजकल सबसे बड़ा अपना है।
- उनके साथ चलने में सुकून नहीं, सिर्फ़ थकान मिली।
- दिल टूटा तो समझ आया, कुछ लोग सिर्फ़ इस्तेमाल करने आते हैं।
- मतलबी लोग सूरज की तरह ढलते ही अँधेरा छोड़ जाते हैं।
- जिनकी दोस्ती शर्तों पर टिकी हो, वो पहली आँधी में बिखर जाती है।
- उन्होंने मेरी अच्छाई को मेरी कमज़ोरी समझ लिया।
- जब तक काम था, मैं हीरा था; काम ख़त्म हुआ, मैं पत्थर हो गया।
- सिर्फ़ मतलब के लिए बनाई गई यारी पर कभी नाज़ मत करना।
- जो ग़रज़ से झुके, उनकी विनम्रता पर धोखा मत खाना।
- अब मैं हर मुस्कुराते चेहरे को दो बार परखता हूँ।
- दुनिया में सबसे सस्ती चीज़ है मीठी बात, सबसे महँगी है सच्ची नीयत।
- जिन्हें मेरी ख़ामोशी भी अपने फ़ायदे की लगी, वो मुझे क्या समझेंगे?
- उनके लिए रिश्ता एक सौदा था और मेरे लिए इबादत।
- बहुत कुछ सिखा गए वो लोग जो मुझसे सिर्फ़ फ़ायदा लेकर गए।
- मतलबी लोगों से बदला नहीं लेना, बस उन्हें अपनी ज़िंदगी से हटा देना।
- अब मैं उनके जैसा नहीं बनूँगा, यही मेरी सबसे बड़ी जीत है।
- वो चले गए, पर मुझे पहचानना सिखा गए कि कौन अपना है।
- मतलबी लोग गए तो अच्छा हुआ, घर में जगह और दिल में सुकून बढ़ा।
Matlabi Shayari
मतलबी शायरी उन जज़्बातों की आवाज़ है जो कहने से पहले चुभते हैं और कहने के बाद थोड़ा हल्का कर देते हैं। जब किसी अपने का असली चेहरा सामने आता है, तो शब्द ही हमारा सहारा बनते हैं। यह शायरी शिकायत कम और अपने दर्द को पहचानने का तरीक़ा ज़्यादा है। इसे पढ़कर शायद आपको लगे कि आप अकेले नहीं हैं। इसे सोशल मीडिया स्टेटस या दिल की डायरी में लिखने के लिए इस्तेमाल करें।
- कुछ रिश्ते दिल से नहीं, दिमाग़ से निभाए जाते हैं।
- मतलब निकल गया तो अब पहचानते भी नहीं, वाह रे ज़माने!
- जो ज़रूरत में मिला, वो दोस्त था; जो ज़रूरत पर मिला, वो मतलबी।
- उसका अपनापन भी एक चालाक निवेश निकला।
- हर बार मैंने दिल से निभाया, हर बार उन्होंने हिसाब से।
- सच्चाई कड़वी थी, पर मतलबी मिठास से लाख बेहतर थी।
- वो बदले नहीं थे, बस अब तक मुखौटे में थे।
- कितनी आसानी से कह दिया, “तुम बदल गए हो”, जबकि बदली उनकी नीयत थी।
- जिसने मुझे चाय पर बुलाया, उसकी नज़र मेरी मदद पर थी।
- मतलब पूरा हुआ और कहानी भी ख़त्म।
- मेरे सब्र ने उन्हें और बेपरवाह बना दिया।
- सिर्फ़ मौक़े पर याद आने वाले लोग, यादों में जगह नहीं पाते।
- दर्द इस बात का नहीं कि वो गए, दर्द इस बात का है कि वजह मतलब थी।
- मैंने हर बार माफ़ किया, उन्होंने हर बार फ़ायदा उठाया।
- अब ख़ुद से पूछता हूँ, इतना भोला क्यों था मैं?
- उनके लहज़े में अपनापन था, बस दिल में अपनापन नहीं था।
- एहसान गिनने वाले रिश्ते कभी एहसास नहीं देते।
- मतलब का मौसम बदला तो परिंदे भी नई डाल पर चले गए।
- जो दिल से जुड़ा था, वही सबसे ज़्यादा काम निकालकर गया।
- शब्द बहुत थे उनके पास, पर नियत एक भी साफ़ नहीं थी।
- अब कोई अपना लगे तो भी मैं थोड़ा सतर्क हो जाता हूँ।
- सच यह है कि हर मुस्कान तोहफ़ा नहीं, कभी-कभी योजना होती है।
- भरोसा काँच का था, और उन्होंने उसे खिलौना समझा।
- मेरी ज़रूरत में वो नज़र नहीं आए, अपनी ज़रूरत में हर मोड़ पर थे।
- कुछ लोग तब तक अपने रहते हैं जब तक आप उपयोगी रहते हैं।
- मैंने रिश्ते में दिल लगाया, उसने सिर्फ़ मौक़ा देखा।
- उनकी खामोशी भी इस बार मतलब की भाषा बोल गई।
- जिसे अपना माना, वही सबसे बड़ा सबक़ बन गया।
- जब तक मैं देता रहा, मैं अच्छा था; जिस दिन मना किया, मैं बुरा हो गया।
- यह दर्द नहीं, तजुर्बा है जो महँगे दाम पर मिला।
- ग़रज़ वाली मोहब्बत पर कभी घर मत बसाना।
- वो पास आए तो रोशनी की तरह, गए तो साये की तरह।
- मैं सीधा रहा, इसलिए वो मुझे सीढ़ी समझते रहे।
- झूठी तारीफ़ के पीछे अक्सर सच्चा स्वार्थ छिपा होता है।
- दुआ सलाम तब तक चली जब तक मेरा रुतबा चला।
- उसने कहा था “तुम ही सब कुछ हो”, पर मतलब निकलते ही “तुम कौन?” हो गया।
- समझदार वही है जो मतलब की दोस्ती को पहले ही पहचान ले।
- जिसने मेरे आँसू देखकर भी मुँह फेरा, उसे मैंने भी भुला दिया।
- दिल की क़ीमत वो क्या जानें जो हर चीज़ तौलकर चलते हैं।
- कुछ लोग पास रहकर भी दूर रहते हैं और कुछ दूर रहकर भी दिल में।
- मैं अपनी नरमी को अब कमज़ोरी नहीं बनने दूँगा।
- मतलबी लोगों की भीड़ में एक सच्चा चेहरा मिल जाए, वही बहुत है।
- मैंने सबको अपना माना, इसीलिए शायद मैं ही ग़लत था।
- वो आए और हर चीज़ ले गए, बस एक सबक़ छोड़ गए।
- जब नीयत बदलती है, तो रिश्ते की भाषा भी बदल जाती है।
- मेरी ख़ामोशी को उन्होंने रज़ामंदी समझा, यही उनकी भूल थी।
- जो दिल की क़ीमत न जाने, उसे दिल देना ख़ुद पर ज़ुल्म है।
- अब हर रिश्ते को वक़्त की कसौटी पर कसता हूँ।
- मतलबी चेहरे चले गए, अब आईने में मैं ख़ुद को पहचानने लगा हूँ।
- शुक्र है उस दर्द का, जिसने मुझे असली और नक़ली का फ़र्क़ सिखाया।
Matlabi Duniya Shayari

यह दुनिया एक बड़े बाज़ार जैसी लगती है, जहाँ हर चीज़ की क़ीमत लगती है, यहाँ तक कि रिश्तों की भी। लोग पूछते हैं कि कैसे हो, पर जवाब से ज़्यादा उन्हें अपना फ़ायदा दिखता है। मतलबी दुनिया हमें थका देती है, लेकिन इसी भीड़ में कुछ सच्चे लोग भी छिपे होते हैं। ये शायरी इस बदलती, सौदेबाज़ दुनिया को आईना दिखाती है और हमें याद दिलाती है कि अपनी इंसानियत बचाकर रखना सबसे बड़ी जीत है।
- इस दुनिया के बाज़ार में हर रिश्ता बिकाऊ निकला।
- यहाँ लोग दिल नहीं, फ़ायदा गिनते हैं।
- दुनिया वो आईना है जिसमें अपना चेहरा सबको सबसे सुंदर दिखता है।
- यहाँ हर मुस्कान की क़ीमत होती है, कोई मुफ़्त में नहीं हँसता।
- मतलब की इस नगरी में सच्चाई को कौन पूछता है?
- इस दुनिया में दिल की नहीं, दिमाग़ की चलती है।
- यहाँ हाथ मिलाने वाले भी जेब टटोलते हैं।
- दुनिया का दस्तूर है, उगते सूरज को सलाम, डूबते को अलविदा।
- यहाँ भीड़ बहुत है, पर कंधा देने वाला कोई नहीं।
- जब तक चमक है, तब तक चाहने वाले हज़ार हैं।
- मतलबी दुनिया में सीधे इंसान को बेवक़ूफ़ कहा जाता है।
- यहाँ सब अपनी-अपनी दौड़ में हैं, किसी को किसी का दर्द नहीं दिखता।
- दुनिया ने सिखाया कि हर हाथ बढ़ाने वाला मदद के लिए नहीं बढ़ता।
- कितनी अजीब बात है, यहाँ अपनापन भी किराए पर मिलता है।
- दुनिया की इस महफ़िल में अपनों की गिनती भी सोच-समझकर होती है।
- जिसे देखो वो प्यार जताता है, बस नीयत किसी की साफ़ नहीं होती।
- इस जहाँ में हर चीज़ का मोल है, सिवाय सच्चे दिल के।
- भीड़ में चलना आसान है, पर भीड़ में सच्चा साथी ढूँढना मुश्किल।
- यहाँ वफ़ादारी अब किताबों की बात बनकर रह गई है।
- दुनिया ने कहा “सब ठीक हो जाएगा”, पर साथ किसी ने नहीं दिया।
- मतलब की यह दुनिया शोर बहुत करती है, एहसास कम।
- जहाँ भी गया, लोगों ने रास्ता नहीं, मंज़िल का फ़ायदा पूछा।
- इस ज़माने में अपना वही है जो बिना बुलाए आ जाए।
- यहाँ रिश्ते मोबाइल के नंबर जैसे हैं, ज़रूरत पर डायल होते हैं।
- दुनिया में सबको सब चाहिए, पर देना कोई नहीं चाहता।
- जिस दुनिया में दिल बिकते हों, वहाँ सच्चाई ख़रीदार ढूँढती रह जाती है।
- यहाँ लोग मरहम लगाने नहीं, ज़ख़्म गिनने आते हैं।
- मतलबी दुनिया में सबसे बड़ी दौलत है एक भरोसेमंद इंसान।
- हम सीधे चले तो दुनिया ने टेढ़ा समझा।
- यहाँ ईमानदारी महँगी है और चालाकी सस्ती।
- दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है “मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।”
- इस जहाँ में हर कोई अपने फ़ायदे का आशिक़ है।
- जब दुनिया को परखा तो पाया, हर चेहरे पर एक और चेहरा था।
- कौन किसके लिए रुकता है यहाँ, सबको अपनी मंज़िल की जल्दी है।
- मैंने दुनिया से उम्मीद छोड़ी तो ख़ुद से मोहब्बत हो गई।
- यहाँ सब तारीफ़ करते हैं, पर हौसला कम ही देते हैं।
- हर किसी की अपनी दुनिया है, उसमें बस अपना मतलब बसता है।
- दुनिया की चकाचौंध में इंसानियत कहीं पीछे छूट गई।
- सबके हाथ में फूल हैं, पर पीठ पीछे काँटे भी हैं।
- इस दुनिया ने मुझे सिखाया कि ख़ामोश रहना सबसे बड़ी समझदारी है।
- जो दुनिया को खुश करने निकलता है, वो ख़ुद से दूर हो जाता है।
- यहाँ मरहम भी तब मिलता है जब बदले में कुछ देना हो।
- मतलबी दुनिया में ख़ुद का साथ ही सबसे भरोसेमंद है।
- ज़माने की रीत यही है, काम पड़ा तो गले, काम ख़त्म तो फ़ासले।
- दुनिया भले बदल जाए, मैं अपनी सच्चाई नहीं बदलूँगा।
- यहाँ के मेले में लोग मुखौटे बदलते हैं, पर किरदार वही रहता है।
- इस दुनिया ने मुझे तोड़ा नहीं, बस मज़बूत बना दिया।
- जहाँ सब मतलबी हों, वहाँ एक नेक इंसान बनना ही सबसे बड़ी बग़ावत है।
- अब मैं दुनिया की भीड़ से नहीं, अपने सुकून से रिश्ता रखता हूँ।
- दुनिया मतलबी सही, पर मेरी इंसानियत मेरी अपनी पहचान है।
Rishte Matlabi Shayari
रिश्ते भरोसे और अपनेपन की नींव पर टिकते हैं, लेकिन जब उनमें स्वार्थ घुल जाता है तो वही रिश्ते बोझ बन जाते हैं। कभी माँगते रहना और कभी देना भूल जाना, यही मतलबी रिश्तों की पहचान है। ऐसे रिश्तों में हम निभाते रहते हैं और सामने वाला गिनता रहता है। यह शायरी उन टूटते धागों का दर्द बयान करती है और बताती है कि जो रिश्ता सिर्फ़ फ़ायदे पर खड़ा हो, उसे छोड़ देना भी एक तरह की हिम्मत है।
- जिस रिश्ते में सिर्फ़ मैं देता रहा, वो रिश्ता नहीं, ज़िम्मेदारी थी।
- रिश्ते नाम से नहीं, निभाने से बनते हैं।
- जहाँ अपनापन गिनती में आ जाए, वहाँ रिश्ते गणित बन जाते हैं।
- मतलब की डोर से बँधे रिश्ते हल्के झटके में ही टूट जाते हैं।
- रिश्तों की इमारत भरोसे पर खड़ी होती है, फ़ायदे पर नहीं।
- हमने रिश्तों को जिया, उन्होंने उन्हें इस्तेमाल किया।
- कुछ रिश्ते सिर्फ़ तब तक ज़िंदा रहते हैं जब तक जेब भारी हो।
- रिश्तों में वक़्त न हो तो नाम का रिश्ता भी बेमानी है।
- जो रिश्ता बराबरी पर नहीं चलता, वो एक दिन थककर गिर जाता है।
- तोड़ दिया उन्होंने वो धागा, जिसे मैं बरसों से सँभाल रहा था।
- रिश्तों में मीठा बोलना काफ़ी नहीं, मीठा निभाना भी पड़ता है।
- जिस रिश्ते में हमेशा मैं ही झुका, वहाँ इज़्ज़त कभी बराबर नहीं रही।
- अपनापन दिखाने वाले हज़ार हैं, निभाने वाले कितने?
- रिश्ते तब बोझ लगते हैं जब उनमें प्यार की जगह लेन-देन आ जाए।
- जो रिश्ता सिर्फ़ ज़रूरत में याद आए, उसे रिश्ता कहना ज़्यादती है।
- उन्होंने रिश्ता निभाया नहीं, बस ज़रूरत के हिसाब से ताज़ा किया।
- रिश्तों की सबसे बड़ी हार तब होती है जब एक तरफ़ से कोशिश बंद हो जाए।
- दिल से जुड़े रिश्ते बहुत कम, नाम के रिश्ते बहुत ज़्यादा हैं।
- मैंने हर रिश्ते को निभाया, पर हर रिश्ते ने मुझे आज़माया।
- जब रिश्ते में सम्मान घटता है, तो प्यार भी धीरे-धीरे मरने लगता है।
- कुछ लोग रिश्ता नहीं, रिश्ते का फ़ायदा तलाशते हैं।
- रिश्तों की क़ीमत तब समझ आती है जब वे सच में बिखर जाते हैं।
- बिना शर्त जो साथ दे, वही असली रिश्ता है।
- वो रिश्ता कैसा जिसमें हर बार सफ़ाई मुझे देनी पड़े?
- रिश्ते में जब बराबरी न हो, तब मोहब्बत भी बोझ बन जाती है।
- मेरे हिस्से की मेहनत का मोल उन्हें कभी दिखा ही नहीं।
- रिश्तों को सहेजना आसान नहीं, सबसे मुश्किल है अकेले सहेजना।
- जिस रिश्ते में भरोसा नहीं, वहाँ साथ रहना भी दूरी है।
- जो लोग रिश्ते में हक़ जताते हैं, पर फ़र्ज़ भूल जाते हैं, वे अधूरे होते हैं।
- रिश्तों की सबसे गहरी चोट वही देते हैं जिन्हें हम अपना मानते हैं।
- हमने रिश्तों में दीये जलाए, उन्होंने रोशनी ली और हाथ जला दिए।
- रिश्ते बनाने में सालों लगे, तोड़ने में उन्हें सिर्फ़ एक मतलब लगा।
- अब रिश्तों में कम उम्मीद, ज़्यादा सुकून रखता हूँ।
- जो रिश्ता आपको छोटा महसूस कराए, उसे बड़ा मत बनने दो।
- निभाना सीखा था मैंने, पर सामने वाले को सिर्फ़ उठाना आता था।
- कुछ रिश्ते नाम के रह जाते हैं, एहसास कब के जा चुके होते हैं।
- रिश्तों में चुप्पी तब बढ़ती है जब सुनने वाले कम हो जाते हैं।
- जो रिश्ते वक़्त माँगते हैं, वही सबसे ज़्यादा वक़्त की क़द्र नहीं करते।
- अपने कहने वाले बहुत मिले, अपनाने वाले बहुत कम।
- उन्होंने रिश्ता तोड़ा नहीं, बस उसे बोझ कहकर छोड़ दिया।
- जब रिश्ते में दिल कम और दिखावा ज़्यादा हो, तब समझ लो अंत क़रीब है।
- सच्चे रिश्ते में शिकायत भी प्यार से होती है, ताने से नहीं।
- मैंने हर रिश्ते में पूरा दिया, बदले में अधूरा मिला।
- रिश्ते उतने ही टिकते हैं जितनी ईमानदारी उनमें टिकती है।
- जो रिश्ता मुझे रोज़ तोड़े, उसे जोड़े रखना समझदारी नहीं, मजबूरी है।
- कई बार रिश्ता निभाना नहीं, उसे ख़त्म करना सबसे बड़ा हौसला होता है।
- रिश्तों के जंगल में बहुत से पेड़ मिले, पर छाँव किसी ने नहीं दी।
- मतलबी रिश्तों ने मुझे सिखाया कि ख़ुद का मूल्य ख़ुद तय करना पड़ता है।
- जिस दिन मैंने उम्मीदें छोड़ीं, उस दिन रिश्तों ने मुझे आज़ाद कर दिया।
- जो रिश्ते छूट गए, उन्हीं की जगह सुकून ने ले ली।
Matlabi Dost Shayari

दोस्ती ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत रिश्ता मानी जाती है, लेकिन जब दोस्त ही मतलबी निकल जाए तो चोट सबसे गहरी लगती है। ऐसे दोस्त हँसी में साथ रहते हैं, मगर मुश्किल वक़्त में नज़र नहीं आते। उनकी यारी फ़ायदे पर टिकी होती है, इसलिए फ़ायदा ख़त्म होते ही वे बदल जाते हैं। यह शायरी उन टूटी दोस्तियों के नाम है और हमें याद दिलाती है कि सच्चा दोस्त वही है जो मुसीबत में भी हाथ न छोड़े।
- जो मुश्किल में गायब हो जाए, वो दोस्त नहीं, मौसमी परिंदा था।
- दोस्ती निभाई मैंने, उन्होंने सिर्फ़ काम निकाला।
- यारी में भी हिसाब रखने वाले, यार नहीं होते।
- जिसके साथ हँसी बाँटी, उसी ने मेरे आँसुओं से मुँह मोड़ लिया।
- सच्चे दोस्त की पहचान तब होती है जब सब साथ छोड़ दें।
- मतलबी यार बहुत मिले, पर यारों जैसा यार कोई नहीं।
- उसकी दोस्ती में मोहब्बत कम, मतलब ज़्यादा निकला।
- जिन पर आँख मूँदकर भरोसा किया, उन्होंने ही रास्ता बदल लिया।
- दोस्ती तब तक चली जब तक मेरे पास उनके काम की चीज़ें थीं।
- कितनी महफ़िलें सजाईं हमने, पर हाल पूछने वाला एक भी नहीं आया।
- जो ख़ुशी में तालियाँ बजाए और ग़म में चुप हो जाए, वो दोस्त नहीं, दर्शक है।
- दोस्त के नाम पर मिला दर्द सबसे गहरा होता है।
- मेरी हर मुश्किल में मैं अकेला था, और भीड़ को दोस्त कहता रहा।
- वक़्त ने बता दिया कि कौन किसके कितने क़रीब था।
- दोस्ती वो नहीं जो साथ घूमे, दोस्ती वो है जो बुरे दिनों में साथ खड़ा रहे।
- यार के नाम पर बहुत सारे चेहरे मिले, पर सच्चा चेहरा एक भी नहीं।
- जिसे मैंने अपना सब कुछ दिया, उसने मुझे कुछ भी नहीं समझा।
- ऐसे दोस्तों से दुश्मन भले, कम से कम नीयत तो साफ़ होती है।
- कभी तुझे यार कहने पर नाज़ था, आज शर्मिंदगी है।
- मैंने दोस्ती निभाई जान देकर, उसने क़ीमत लगाई सामान की तरह।
- जब ज़रूरत पड़ी तब जिसे आवाज़ दी, उसने फ़ोन ही काट दिया।
- यारी वो नहीं जो फ़ायदे से शुरू हो और नुक़सान पर ख़त्म हो।
- मतलबी दोस्त वो आईना हैं जो सिर्फ़ अपना चेहरा दिखाते हैं।
- उसने दोस्ती की क़समें खाईं, फिर ख़ुद ही क़समें तोड़ दीं।
- अपने दोस्तों की गिनती कम रखो, पर सच्ची रखो।
- जिनसे दिल की बातें कहीं, उन्होंने ही उन्हें हथियार बना लिया।
- मेरा दर्द देखकर भी जो अनजान बना, वो दोस्त कहलाने का हक़ खो बैठा।
- वक़्त बदला तो दोस्त भी बदल गए, पर मैं वहीं का वहीं रहा।
- साथ चाय पीने वाले बहुत मिले, साथ दुख बाँटने वाला कोई नहीं।
- दोस्ती में दरार तब पड़ती है जब एक तरफ़ सिर्फ़ फ़ायदा बचे।
- वो हर बार अपनी बात मनवाता रहा, और मैं दोस्ती बचाता रहा।
- जिसे मैंने कंधा दिया, उसने मुझे सहारा देना भी ज़रूरी नहीं समझा।
- दोस्त की मतलबपरस्ती दिल पर ऐसा निशान छोड़ती है जो आसानी से नहीं मिटता।
- उसकी यारी का रंग उतर गया जब मेरे हालात का रंग फीका पड़ा।
- सच्चे दोस्त को ढूँढना नहीं पड़ता, वो मुसीबत में ख़ुद चला आता है।
- उसकी हँसी में कभी मेरा दुख शामिल ही नहीं हुआ।
- मतलबी यारी का अंजाम हमेशा तन्हाई होता है।
- जिसे हर राज़ बताया, उसी ने मेरा भरोसा बेच दिया।
- जो दोस्त सिर्फ़ सेल्फ़ी में साथ दिखे, असल ज़िंदगी में वो अनजान रहे।
- दोस्ती में वो मोल कहाँ जो सिर्फ़ ज़रूरत से बँधा हो?
- दोस्तों की भीड़ में भी मैं सबसे अकेला इंसान निकला।
- मतलबी दोस्त की याद आए तो हँस देता हूँ, कि मैंने क्या-क्या सहा।
- जिस दिन मैंने माँगा नहीं, उस दिन से उनकी मुलाक़ातें भी बंद हो गईं।
- उनकी दोस्ती का सबूत बस सोशल मीडिया तक सीमित था।
- कुछ दोस्त बस तस्वीरों के लिए होते हैं, तकलीफ़ों के लिए नहीं।
- मैंने यारी में जो खोया, उससे ज़्यादा सबक़ पाया।
- जो मतलबी दोस्त छूट गए, उनकी जगह अब ख़ुद पर यक़ीन ने ले ली।
- अब यारों की गिनती नहीं, उनकी नीयत परखता हूँ।
- जिस दोस्त ने साथ छोड़ा, उसने मुझे मज़बूत होना सिखाया।
- सच्चा दोस्त एक भी हो तो काफ़ी है, भीड़ तो मतलब की होती है।
Matlabi Paise ki Duniya Hai Shayari
पैसा ज़रूरत है, लेकिन जब वही रिश्तों की कसौटी बन जाए तो दिल टूट जाता है। जेब भरी हो तो हर कोई अपना लगता है और जेब ख़ाली हो तो अपने भी पराये बन जाते हैं। यह दौर पैसे की चमक से इतना अंधा है कि इंसान की क़ीमत उसके बैंक बैलेंस से आँकी जाती है। यह शायरी उसी कड़वी सच्चाई को बयां करती है और याद दिलाती है कि असली दौलत वह है जो मुश्किल में साथ खड़ी हो।
- यह पैसे की दुनिया है, यहाँ जेब देखकर इज़्ज़त मिलती है।
- जब तक जेब भारी थी, हर कोई अपना था।
- ग़रीबी में रिश्ते नहीं, सिर्फ़ पहचान के चेहरे बचते हैं।
- पैसा आते ही दोस्त बढ़े, पैसा जाते ही सब पराये हुए।
- दौलत की चमक ने रिश्तों की सादगी निगल ली।
- यहाँ इंसान की नहीं, उसकी कमाई की पूछ होती है।
- सिक्कों की खनक में रिश्तों की आवाज़ दब गई।
- ग़रीब की सच्चाई पर भी अमीर का झूठ भारी पड़ता है।
- पैसा नहीं था तो किसी ने हाल नहीं पूछा, आज सब सलाम करते हैं।
- इस ज़माने में नोट ही इंसान की असली पहचान है।
- ग़रीबी ने मुझे अपनों का असली चेहरा दिखा दिया।
- जब थैली भरी थी, तब हर रिश्ता मीठा था।
- जेब ख़ाली हुई तो लोगों की आँखों से अपनापन भी ख़ाली हो गया।
- पैसा इंसान को ऊँचा बना देता है, पर कई बार इंसानियत से नीचे भी गिरा देता है।
- यहाँ रिश्ते बैंक के खाते जैसे हैं, जितना जमा करो उतना मिलता है।
- तंगी में जो साथ चले, वही असली दौलत वाले लोग हैं।
- दौलत वालों को सलाम और ग़रीबों को सलाह, यही इस दुनिया का दस्तूर है।
- मैंने पैसे नहीं कमाए तो लोगों ने मुझे भी कमाया हुआ नहीं माना।
- रुपयों की इस भीड़ में दिल की क़ीमत सबसे सस्ती है।
- जिनके पास कुछ नहीं, उनके पास कम से कम धोखा नहीं होता।
- पैसे की गर्मी में बहुतों के रिश्ते पिघलते देखे हैं।
- यहाँ हर रिश्ता तराज़ू पर तुलता है, एहसासों पर नहीं।
- जब कमाई कम थी, तब अपनों की नज़रें भी तिरछी थीं।
- पैसे की दुनिया में सबसे महँगी चीज़ है सच्चा साथ।
- मेरी ग़रीबी में किसी ने मुझे अपना नहीं कहा, अमीरी में सब रिश्तेदार निकले।
- दौलत की दौड़ में लोग अपनों को पीछे छोड़ आए।
- ग़रीबी ने मुझे सिखाया कि कौन दिल से है और कौन दाम से।
- जेबें खाली हों तो आवाज़ भी बेअसर हो जाती है।
- यहाँ तारीफ़ भी तभी होती है जब बदले में कुछ मिलने की उम्मीद हो।
- पैसों से सब ख़रीद लो, पर सच्चा अपनापन कभी नहीं मिलेगा।
- इस दौर में मोहब्बत भी बैंक बैलेंस देखकर होती है।
- मैंने ग़रीबी में रोटी बाँटी, अमीरों ने महफ़िल में भी मेरा हाल नहीं पूछा।
- पैसे का नशा इंसान को अपनों से भी अजनबी बना देता है।
- जिसके पास पैसा है, उसके पास रिश्तों की क़तारें हैं।
- जब तक मुझसे फ़ायदा था, मेरी हर बात अच्छी लगती थी।
- ग़रीब का दर्द किसी रिश्तेदार की महफ़िल में चर्चा नहीं बनता।
- नोटों की गड्डी में अपनापन खोजने वाले एक दिन ख़ुद खो जाते हैं।
- जो मुश्किल वक़्त में पैसे के बिना साथ दे, वही असली अमीर है।
- पैसे की चमक उन्हें दिखती है जिन्हें दिल की रोशनी नहीं दिखती।
- दुनिया ने मेरी क़ीमत मेरी कमाई से लगाई, मेरे किरदार से नहीं।
- जब हाथ तंग था, तब मैंने अपनों की असली औक़ात देखी।
- अमीरी में हर कोई याद रखता है, ग़रीबी में कोई नहीं पूछता।
- पैसे की इस भूख ने कई रिश्तों का क़त्ल कर डाला।
- दौलत की बुनियाद पर बने रिश्ते ज़्यादा दिन नहीं टिकते।
- मुफ़लिसी ने मुझे जीना सिखाया और दौलत ने लोगों को पहचानना।
- पैसा आता-जाता है, पर जो रिश्ते निभ जाएँ, वही असली कमाई हैं।
- मैंने पैसे गँवाए तो लोग गँवाए, पर सुकून पा लिया।
- जो दौलत से नहीं, दिल से मिले, उसे ही अपना समझना।
- जेब चाहे कितनी भी भरी हो, ज़मीर ख़ाली न होने देना।
- पैसों की दुनिया में सबसे बड़ा अमीर वो है जिसके पास भरोसेमंद लोग हैं।
Matlabi Shayari in Hindi

हिंदी की सादगी में कहे गए दर्द के शब्द सीधे दिल तक पहुँचते हैं। मतलबी लोगों के बारे में हिंदी में लिखी शायरी न सिर्फ़ जज़्बात बयां करती है, बल्कि ज़िंदगी के कड़वे सबक़ भी देती है। इसमें शिकायत के साथ-साथ ख़ुद को सँभालने और आगे बढ़ने की हिम्मत भी झलकती है। अगर आप अपने मन की बात सरल और असरदार हिंदी में कहना चाहते हैं, तो ये पंक्तियाँ आपके स्टेटस, कैप्शन या डायरी के लिए ख़ूबसूरत विकल्प बन सकती हैं।
- मतलब निकल गया तो पहचानने से भी इंकार कर दिया।
- ज़रूरत पड़ी तो हम अपने थे, ज़रूरत गई तो पराये हो गए।
- शब्द मीठे थे उनके, पर इरादे कड़वे निकले।
- जो कल तक हमदर्द था, आज उसकी नज़र में हम बेकार हैं।
- जिसने हर क़दम पर साथ का वादा किया, वही पहला क़दम पीछे खींच गया।
- मतलबी इंसान का दिल पत्थर नहीं, बर्फ़ होता है, काम होते ही पिघल जाता है।
- अब तक सीखा था देना, अब सीख रहा हूँ परखना।
- हर किसी को अपना समझने की भूल ने मुझे बहुत रुलाया।
- सहारा बनकर आए थे, पर बोझ समझकर चले गए।
- मेरे सीधेपन को उन्होंने मेरी कमज़ोरी समझ लिया।
- दिल की बात कहकर मैंने ग़लती की, अपनों की नीयत नहीं पहचानी।
- जब तक आवाज़ में दम था, लोग सुनते रहे; जब ख़ामोश हुआ तो सब चले गए।
- उनके लिए मैं एक विकल्प था, मेरे लिए वो पूरी दुनिया थे।
- यह कहानी दर्द की नहीं, उन सबकों की है जो मुझे लोगों ने सिखाए।
- जिसने मुझे ठुकराया, आज उसी को मेरी कमी खल रही है, यह वक़्त का इंसाफ़ है।
- जो भी आया, मेरी मासूमियत का फ़ायदा उठाकर चला गया।
- आँखें खुली तो पता चला कि मैंने किसे अपना समझ लिया था।
- सिर्फ़ दिखावे के रिश्ते कभी दिल में जगह नहीं बना पाते।
- मेरी मेहनत का फल सबने खाया, पर पेड़ को पानी किसी ने नहीं दिया।
- वक़्त ने बहुत से चेहरे दिखाए, कुछ मुस्कराते, कुछ मुखौटे वाले।
- प्यार से पेश आया तो लोगों ने कमज़ोर समझा, अब मैं ख़ामोश रहता हूँ।
- जिन्हें मैंने अपना सब कुछ सौंपा, उन्होंने मुझे पूरी तरह ख़ाली कर दिया।
- मैं सीधा ज़रूर हूँ, पर बेवक़ूफ़ नहीं, यह अब सबको समझ आ जाएगा।
- अब किसी से उम्मीद नहीं, यही सबसे बड़ा सुकून है।
- दिल में जो जगह दी थी, उसी जगह ने ज़ख़्म दिए।
- जिनको मैं समझ नहीं पाया, वही मुझे सबसे अच्छी तरह इस्तेमाल कर गए।
- बहुत सरल है मेरा दिल, इसीलिए बहुतों ने इसे आज़माया।
- मैं हर रिश्ते में ईमानदार रहा, यही मेरी सबसे बड़ी ग़लती थी।
- वो सोचते रहे कि मैं नहीं समझता, मैं बस चुप रहा था।
- मेरी चुप्पी में जो सवाल थे, उनका जवाब उनके पास नहीं था।
- जितनी बार भरोसा किया, उतनी बार हारा; अब भरोसा करना ही छोड़ दिया।
- अब मैं हर रिश्ते से पहले अपनी इज़्ज़त का हिसाब कर लेता हूँ।
- जिनके दिल में जगह नहीं थी, उन्हें मैंने अपना घर दे दिया।
- सब कुछ लुटाकर भी जब कुछ न मिला, तब जाना कि मैं ग़लत जगह पर था।
- एक दिन ऐसा आएगा जब वो मेरी क़द्र करेंगे, पर तब मैं नहीं रहूँगा।
- जो हाथ पकड़कर चलना सिखाते थे, वही आज रास्ते में छोड़ गए।
- उनकी बेरुख़ी ने मुझे आत्मनिर्भर बना दिया।
- जिन आँखों में कभी अपनापन था, आज उनमें अजनबीपन है।
- वक़्त सबको जवाब देता है, मतलबी लोगों को भी।
- अगर लौटकर आओ भी तो अब मैं वो पहले जैसा नहीं मिलूँगा।
- मैंने उन्हें दिल दिया, उन्होंने मुझे बस एक रास्ता समझा।
- अब सोचकर बोलता हूँ, क्योंकि लोग सुनते कम और इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं।
- मेरी अच्छाई को उन्होंने मेरी मजबूरी समझा, यही उनकी भूल थी।
- जो समझ गया वो बच गया, जो भरोसा करता रहा वो ठगा गया।
- दिल की बात सबसे नहीं कही जाती, यह मैंने बहुत देर से सीखा।
- दर्द ने सिखा दिया कि ख़ुद को प्राथमिकता देना स्वार्थ नहीं है।
- मैं टूटा ज़रूर, पर इसी टूटन ने मुझे मज़बूत जोड़ भी दिए।
- मतलबी लोगों के लिए अब मेरे पास सिर्फ़ ख़ामोशी है।
- उनके दिए ज़ख़्म अब मेरी ताक़त बन गए हैं।
- मैंने दर्द से सबक़ लिया और मतलब वालों को माफ़ करके आगे बढ़ गया।
Matlabi Duniya Shayari in Hindi
मौसम की तरह दुनिया के रंग बदलते रहते हैं, और इंसान भी हालात देखकर रुख़ बदल लेता है। प्रकृति से मिलती-जुलती उपमाएँ मतलबी दुनिया का सच और भी साफ़ दिखाती हैं। जैसे परिंदे सूखे पेड़ को छोड़ देते हैं, वैसे ही लोग ज़रूरत ख़त्म होते ही साथ छोड़ देते हैं। इस हिस्से की शायरी में मौसम, पेड़, परिंदे, साये और दीये जैसी तस्वीरों के ज़रिए दुनिया की इस बदलती फ़ितरत को बयां किया गया है।
- सूखे पेड़ से परिंदे भी रिश्ता तोड़ लेते हैं, फिर इंसान तो इंसान है।
- साया भी अँधेरे में साथ छोड़ देता है, लोगों से क्या शिकवा?
- जब तक फल थे डाल पर, हर कोई पास आता रहा।
- पतझड़ आया तो पत्तों ने भी पेड़ को अकेला कर दिया।
- बहार में सब साथ थे, ख़िज़ाँ में किसी ने नहीं पूछा।
- दीया जब तक जलता रहा, पतंगे आते रहे; बुझा तो सब चले गए।
- दुनिया उस नदी जैसी है जो हर रेगिस्तान से बचकर बहती है।
- बादल उसी खेत पर बरसते हैं जो पहले से हरा हो।
- सूरज के रहते सबने छाँव ढूँढी, ढलते ही सबने पीठ फेर ली।
- दुनिया के समंदर में कश्तियाँ बहुत हैं, पर किनारे कम हैं।
- जैसे हवा रुख़ बदलती है, वैसे ही लोग भी बदल जाते हैं।
- फूल खिले तो भँवरे आए, मुरझाए तो कोई नहीं रुका।
- आसमान के तारे भी चाँद के आगे फीके पड़ जाते हैं, यहाँ इंसान की क्या बिसात?
- दुनिया की धूप में सबने अपनी-अपनी छत ढूँढ ली, मेरे लिए कोई जगह न थी।
- सर्दी में अलाव सबको भाता है, गर्मी में उसी से दूरी बना लेते हैं लोग।
- नदी की तरह सबको देता रहा, पर रेत ने भी मुझे सोख लिया।
- वक़्त की आँधी आई और सब पराये पत्तों की तरह उड़ गए।
- मौसम की तरह बदलना दुनिया की पुरानी आदत है।
- जब तक मीठा पानी था कुएँ में, भीड़ लगी रही; सूखा तो कोई न आया।
- दुनिया का हर मोड़ किसी नए धोखे की गली में खुलता है।
- शाम होते ही पंछी लौट जाते हैं, और लोग सुबह का फ़ायदा देखकर आते हैं।
- दरिया ने बहुतों की प्यास बुझाई, पर उसकी तन्हाई किसी ने नहीं देखी।
- चाँदनी रात में सब साथ चलते हैं, अमावस में हाथ भी छूट जाता है।
- दुनिया की महफ़िल में चराग़ बहुत थे, रोशनी देने वाला कोई नहीं।
- जो बारिश में छतरी बने, वही असली साथी निकला; धूप में तो हर कोई हमसाया है।
- तूफ़ान आया तो पता चला कि कौन सा पेड़ जड़ से जुड़ा था।
- दुनिया शतरंज की बिसात है, यहाँ हर मोहरा अपनी चाल चल रहा है।
- बाग़ की बहार में सब ख़ुशबू के दीवाने थे, काँटों से कोई वास्ता न रखा।
- आँगन में चिड़ियाँ तभी आती हैं जब दाना बिखरा हो।
- आसमान सबको छाँव देता है, फिर भी लोग उसे ही बदलते मौसम का दोष देते हैं।
- हवा जिधर चलती है, लोग उधर ही रुख़ कर लेते हैं।
- रास्ते बहुत थे, पर साथ चलने वाले कम ही निकले।
- दुनिया की इस बाज़ार में मोहब्बत भी मंडी में खड़ी दिखती है।
- जिस चौखट से सबको खाना मिला, उसी चौखट को लोग भूल गए।
- लहरें किनारे तक आती हैं, पर लौट जाती हैं, ठीक इन्हीं लोगों की तरह।
- जंगल में सब पेड़ साथ थे, पर आग लगी तो हर पेड़ अकेला जला।
- दुनिया का दस्तूर है कि सूरज को सब पूजते हैं, पर दीये की क़द्र अँधेरे में होती है।
- सब्ज़ पत्तों को सब चाहते हैं, पीले पत्तों को हवा के हवाले कर देते हैं।
- पहाड़ों जैसी स्थिरता सबको चाहिए, पर पहाड़ बनना कोई नहीं चाहता।
- झील का पानी शांत दिखता है, पर नीचे कितनी गहराई है, कौन जाने?
- यहाँ मरहम माँगने वाले ज़्यादा हैं, मरहम बनने वाले कम।
- मोती की क़द्र सब करते हैं, सीप का दर्द कोई नहीं समझता।
- दुनिया तेज़ भागती है, पर पीछे रह जाने वालों की ख़बर नहीं रखती।
- रात के सन्नाटे में दुनिया का असली चेहरा सुनाई देता है।
- जब भी भँवर में फँसा, साहिल पर खड़े लोगों को बस तमाशा देखते पाया।
- दुनिया की यह मिट्टी बहुत उपजाऊ है, यहाँ मतलब की फ़सलें खूब उगती हैं।
- हर सुबह सूरज एक नई उम्मीद लाता है, भले दुनिया कितनी भी मतलबी हो।
- बदलती दुनिया ने मुझे मौसम से भी ज़्यादा चौकन्ना बना दिया।
- दुनिया रंग बदलती रही और मैं अपनी सच्चाई के रंग में रंगा रहा।
- दुनिया की भीड़ में ख़ुद का दीया बनना सीख लिया है मैंने।
Matlabi Logo Ke Liye Shayari
कभी-कभी चुप रहना काफ़ी नहीं होता, और कुछ बातें सीधे उन लोगों तक पहुँचनी ज़रूरी होती हैं जिन्होंने हमें इस्तेमाल किया। यह हिस्सा सीधे मतलबी लोगों को संबोधित करती हुई शायरी का है, जिसमें दर्द के साथ आत्मसम्मान और चेतावनी भी है। इन पंक्तियों में गुस्सा नहीं, बल्कि गरिमा है, क्योंकि सबसे अच्छा जवाब अपनी ख़ुशी और सफलता से दिया जाता है। इन्हें आप अपने स्टेटस या कैप्शन के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- तुम्हें जाना था तो जाते, पर मेरा भरोसा साथ क्यों ले गए?
- मतलबी हो तुम, यह बात मैं अब मुस्कुराकर कह सकता हूँ।
- जिस दिन तुम्हें मेरी क़द्र होगी, उस दिन मैं दूर बहुत दूर निकल चुका होऊँगा।
- मेरा दरवाज़ा एक बार खुलता है, मतलब के लिए दोबारा नहीं।
- तुम्हारे जैसे लोगों ने ही मुझे अकेले चलना सिखाया है, शुक्रिया।
- तुमने जो चाहा वो ले लिया, अब मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।
- तुम्हारी नीयत की सच्चाई तुम्हारा आईना बेहतर जानता होगा।
- मेरा दिल तुम्हारे जैसे लोगों के लिए अब पत्थर नहीं, दीवार है।
- तुम्हारे जाने से जो खाली हुआ, उसे मैंने ख़ुद से भर लिया।
- जिस दिन तुम पर वक़्त पड़ेगा, मैं नहीं पूछूँगा, पर दुआ ज़रूर दूँगा।
- तुमने मुझे इस्तेमाल किया, पर मैंने तुम्हें पहचानना सीख लिया।
- तुम्हारा मतलब पूरा हुआ, मेरा सबक़ भी।
- लौटकर मत आना, क्योंकि अब मेरे पास तुम्हारे लिए जगह नहीं।
- मैंने तुम्हें खो दिया नहीं, बस तुमसे छुटकारा पा लिया।
- जिनके लिए मैं सब कुछ था, उनके लिए अब मैं कुछ नहीं, और यह भी ठीक है।
- तुम्हारे झूठे वादों ने मुझे सच बोलना सिखा दिया।
- तुमने मेरे भरोसे को जिस तरह तोड़ा, उसी ने मुझे मज़बूत बना दिया।
- मतलबी लोगों से बदला नहीं, बस दूरी ही काफ़ी है।
- तुम्हारे चले जाने के बाद मैंने अपने दिन अच्छे कर लिए।
- मेरी ख़ामोशी को मेरी हार मत समझना, यह मेरी समझदारी है।
- तुम्हारे जैसे लोग पास हों तो दुश्मनों की ज़रूरत नहीं रहती।
- मैंने तुम्हारे लिए रातें जागीं, तुमने मेरे लिए एक सुबह भी नहीं दी।
- जिसने मेरे सच्चे दिल की क़द्र नहीं की, वह मेरी दुआओं के क़ाबिल भी नहीं।
- तुम्हारी तरह बनने से अच्छा है मैं अकेला रह जाऊँ।
- तुम जैसे लोग मुझे रोज़ याद दिलाते हैं कि ख़ुद पर यक़ीन रखना ज़रूरी है।
- मेरी माफ़ी तुम्हारे लिए इनाम थी, तुमने उसे अधिकार समझ लिया।
- तुम्हें लगता है तुमने मुझे छोड़ा, हक़ीक़त में मैंने तुम्हें आज़ाद किया।
- तुम्हारे बिना भी मैं जी रहा हूँ, और पहले से बेहतर।
- जो मतलब के लिए रुका, उसे जाते देखकर दुख नहीं होना चाहिए।
- तुम्हारी चालाकी मुझे अब हँसाती है, रुलाती नहीं।
- मैंने तुम्हें अपना माना, यही मेरी ग़लती थी, तुम्हारी नहीं।
- तुम्हारे जैसे लोग रास्ते के पत्थर हैं, जिन्हें पार करके ही मंज़िल मिलती है।
- मुझे तुम्हारे मतलब से नहीं, तुम्हारी नीयत से शिकायत है।
- तुम्हारी हर मुस्कान में अब मुझे सौदा नज़र आता है।
- जिन रिश्तों में अपनापन नहीं, वे मेरी ज़िंदगी में दोबारा नहीं आएँगे।
- तुमने जो बोया है, वक़्त उसकी फ़सल ज़रूर देगा।
- मेरी अच्छाई का बदला मुझे तुमसे नहीं, वक़्त से मिलेगा।
- तुम्हारी कमी नहीं, तुम्हारी आदत खलती थी, अब वो भी नहीं रही।
- तुम मुझे भूल जाओ, यही तुम्हारी सबसे अच्छी बात होगी।
- मैंने तुम्हारी हर ग़लती माफ़ की, अब ख़ुद को माफ़ करना बाक़ी है।
- तुम्हारे धोखे ने मुझे जो दिया, वो कोई साथी नहीं दे सकता था: समझ।
- जाते-जाते भी तुमने मतलब नहीं छोड़ा, अलविदा भी अपने फ़ायदे से कहा।
- तुम्हें जो चाहिए था वो मिल गया, अब मेरी दुआ भी मिल जाए, यही बहुत है।
- मैं तुम्हारे जैसा नहीं बनूँगा, यही मेरी तरफ़ से सबसे बड़ा जवाब है।
- तुम्हारी वजह से मैंने ग़लत रास्ते नहीं चुने, बस सही लोग पहचानना सीखा।
- तुम मुझे भुलाओगे तो भी मेरी सच्चाई तुम्हारी नींद में आएगी।
- तुम्हारे बनाए ज़ख़्म अब मेरी कहानी का सबसे मज़बूत अध्याय हैं।
- जो चले गए उन्हें जाने दो, क्योंकि जो रहेंगे वही तुम्हारे होंगे।
- तुम्हारे लिए मेरा आख़िरी तोहफ़ा है, मेरी चुप्पी और मेरी दुआ।
- मतलबी लोगों, तुम्हें शुक्रिया, तुमने मुझे ख़ुद से मिलवा दिया।
Matlabi Rishtedar Shayari
रिश्तेदारों से हम सबसे ज़्यादा अपनापन उम्मीद करते हैं, और यहीं चोट भी सबसे गहरी लगती है। शादी-ब्याह में गले मिलने वाले रिश्तेदार मुश्किल घड़ी में अक्सर बहाने बना लेते हैं। कुछ लोग सिर्फ़ फ़ायदा देखकर पास आते हैं और तरक़्क़ी देखकर जलने लगते हैं। यह शायरी उन्हीं मतलबी रिश्तेदारों के रवैये को शब्द देती है और हमें याद दिलाती है कि ख़ून का रिश्ता तब तक मायने रखता है, जब तक उसमें दिल का रिश्ता भी हो।
- ख़ून के रिश्ते तब तक अपने हैं जब तक उनमें मतलब नहीं घुलता।
- रिश्तेदार वो आईना हैं जो तुम्हारी तरक़्क़ी में अपना चेहरा जलता देखते हैं।
- जिनके घर जाना हमारा फ़र्ज़ था, वे हमारे घर आना भी भूल गए।
- शादी में गले मिले, पर मुसीबत में फ़ोन तक नहीं किया।
- रिश्तेदारी निभाने में हमने जो खोया, उसका हिसाब किसी ने नहीं रखा।
- जब पैसे की ज़रूरत पड़ी, तब रिश्तेदारों की ज़ुबान बदल गई।
- कुछ रिश्तेदार सिर्फ़ मौक़ों पर सजते हैं, दुख में कहीं नहीं दिखते।
- जिन्हें अपना कहकर हर बार सहारा दिया, वही बँटवारे पर पराये निकले।
- रिश्तेदारी का मतलब अब हाल पूछना नहीं, हाल जाँचना हो गया है।
- मीठी बातें करके जो घर आए, वे घर की दीवारों से भी जलने लगे।
- अपनों की भीड़ में जब ज़रूरत पड़ी, तो बस अपना साया ही साथ था।
- रिश्तेदार तब पास आते हैं जब हमारी सफलता की ख़बर फैलती है।
- जिस घर ने दिल खोलकर स्वागत किया, उसी की बुराई उन्होंने बाहर की।
- कई रिश्तेदार हँसकर मिलते हैं और पीठ पीछे हँसी बनाते हैं।
- बुरे वक़्त में जो रिश्तेदार दूर रहे, अच्छे वक़्त में उनके हाथ फिर बढ़ आए।
- शादी-ब्याह की रौनक में वे सबसे आगे थे, मातम के सन्नाटे में सबसे पीछे।
- रिश्तेदारों से ज़्यादा उम्मीद रखना अपनी ही मुसीबत बढ़ाना है।
- जिन्हें हम अपने घर का हिस्सा समझते थे, वे हमारी मुसीबतों के तमाशबीन निकले।
- रिश्तेदारी की बुनियाद जब लालच पर टिकी हो, तो दीवारें एक दिन गिरती हैं।
- जिसने मेरी मदद ली, उसने कभी मेरी ख़ुशी में हिस्सा नहीं लिया।
- मेरे आँगन की रौनक तब तक थी जब तक रिश्तेदारों का मक़सद पूरा न हुआ।
- रिश्तेदार वह चाबी हैं जो ताला खोलने तो आती हैं, पर घर बनाने नहीं।
- जिनके नाम के साथ “अपना” जुड़ा था, वही सबसे दूर निकले।
- ख़ुशी बाँटने वाले मिलते हैं सैकड़ों, पर दुख बाँटने वाला रिश्तेदार शायद ही मिले।
- कई रिश्तेदार हाल नहीं, हैसियत पूछते हैं।
- जब ज़रूरत पड़ी तो बहाने बने, जब फ़ायदा दिखा तो रास्ते बने।
- रिश्तेदारों से मिली सीख: अपनों से ज़्यादा ख़ुद पर भरोसा रखो।
- जिन चाचा-मामा ने गोद में खिलाया, वही आज बँटवारे में बेरुख़ी दिखा गए।
- जो रिश्तेदार तुम्हारी असफलता पर सलाह दें, पर सफलता पर चुप रहें, उन्हें पहचान लो।
- त्योहारों पर जो रिश्तेदार तोहफ़े गिनते हैं, उनका प्यार भी गिना-चुना होता है।
- घर के बुज़ुर्ग कहते थे कि रिश्ते निभाओ, पर किसी ने यह नहीं बताया कि निभाने वाले कितने कम मिलेंगे।
- मतलबी रिश्तेदारों से दूरी रखना सबसे सस्ता और सबसे सुकून भरा इलाज है।
- जिन्हें कभी दिल से मदद दी, उन्होंने ही उसे मेरी मजबूरी कहा।
- रिश्तेदारी की चौखट पर कई बार इज़्ज़त बाहर छोड़नी पड़ती है।
- वे रिश्तेदार जो बुराई के लिए मिलते हैं, उनसे अच्छा है कि कोई न मिले।
- दूर के रिश्तेदार कई बार पास के अपनों से बेहतर निकले।
- हमारी हँसी में शामिल रहे, पर हमारे आँसुओं से हिसाब माँगते रहे।
- रिश्तेदारों ने पूछा “कैसे हो?”, जवाब सुनने की फ़ुरसत किसी के पास नहीं थी।
- कुछ रिश्तेदार वो कँटीली झाड़ियाँ हैं, जो फूलों के भेष में आती हैं।
- रिश्तेदारी की सबसे ख़ूबसूरत बात है इज़्ज़त, और सबसे बड़ी कमी है उसका अभाव।
- जिनकी वजह से मेरा घर बँटा, वही आज प्रेम की बातें करते हैं।
- जब मैं टूटा, तो रिश्तेदार तमाशा देखने आए, सहारा देने नहीं।
- मतलबी रिश्तेदार हमें सिखा जाते हैं कि अपना वही है जो मुश्किल में साथ हो।
- उनके घर की दहलीज़ पर इज़्ज़त नहीं, सिर्फ़ औपचारिकता मिली।
- रिश्तेदारों की भीड़ में मैं हमेशा सबसे अकेला मेहमान रहा।
- जिन रिश्तों में दिल नहीं, उन्हें सिर्फ़ नाम के लिए निभाने की कोई ज़रूरत नहीं।
- रिश्तेदारों ने ताने दिए, पर वक़्त ने उन्हीं तानों को मेरी ताक़त बना दिया।
- अब मैं हर रिश्तेदार से मुस्कुराकर मिलता हूँ, पर उम्मीदें घर पर छोड़ आता हूँ।
- जो रिश्तेदार दिल से अपने हों, उन्हें सँभालकर रखना, वे बहुत कम होते हैं।
- ख़ुदा करे हर किसी को एक ऐसा रिश्तेदार मिले जो बिना मतलब के भी याद करे।
मतलबी रिश्तों पर शायरी हिंदी में
प्यार और अपनेपन के रिश्तों में जब एक इंसान सिर्फ़ ज़रूरत के लिए जुड़ता है, तो दूसरे का दिल धीरे-धीरे टूटता जाता है। ऐसे रिश्ते बाहर से सुंदर दिखते हैं, मगर भीतर से खोखले होते हैं। इस हिस्से की शायरी भावनात्मक रिश्तों, मोहब्बत और जुड़ाव की उस कसक को समेटती है जब सामने वाला सिर्फ़ अपने हिसाब से साथ निभाता है। यह उन सबके लिए है जिन्होंने प्यार दिया और बदले में सिर्फ़ मतलब पाया।
- कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनमें प्यार कम और मजबूरी ज़्यादा होती है।
- उसने मोहब्बत नहीं की, बस अपनी तन्हाई का इलाज किया।
- जब तक मेरी ज़रूरत थी, वो मेरे हर लफ़्ज़ का दीवाना था।
- रिश्ते में जब सिर्फ़ मैं ही मैं रह जाए, तो हम कहीं खो जाता है।
- प्यार देने वाले को अक्सर यह एहसास नहीं होता कि सामने वाला सिर्फ़ ले रहा है।
- मैंने रिश्ते में दिल रखा, उसने बस सुविधा देखी।
- उसकी मोहब्बत की बुनियाद में मेरी उपयोगिता लिखी थी।
- जिस रिश्ते में सुनने वाला कोई न हो, वहाँ बोलना भी बेकार है।
- कुछ रिश्ते बिना कहे ही ख़त्म हो जाते हैं, क्योंकि उनमें कहने लायक़ कुछ बचा ही नहीं होता।
- जब वो मुझसे बात करता था, तो उसकी आँखें मेरे बाद की योजनाएँ देखती थीं।
- दिल का रिश्ता तब मर जाता है जब उसमें फ़ायदे की साँस चलने लगे।
- मैं उसके लिए रुकी रही, वो मेरे लिए कभी नहीं ठहरा।
- वो मुझे अपना कहता रहा, पर कभी मेरा साथ नहीं दिया।
- जिस रिश्ते में मैं ही कोशिश करूँ, वो रिश्ता नहीं, इम्तिहान है।
- उसकी मोहब्बत का मौसम जल्दी बदला, जब मेरे पास देने को कुछ न रहा।
- प्यार अगर सौदा हो जाए, तो उसे बिकने में देर नहीं लगती।
- मैंने उसे अपना सब कुछ दिया, वो मेरा कुछ भी न बना।
- उसने मेरा हाथ थामा नहीं, मुझे अपनी सीढ़ी बना लिया।
- जब तक मैं मुस्कुराती रही, वो पास रहा; जिस दिन टूटी, वो दूर चला गया।
- रिश्ते में जब अपनापन ख़त्म हो जाए, तो साथ रहना सबसे बड़ी तन्हाई है।
- जिन्हें मैंने दिल दिया, उन्होंने उसे अपनी सहूलियत की जगह बना लिया।
- सुबह की तरह साथ आया और रात की तरह छोड़कर चला गया।
- कई बार प्यार की सबसे बड़ी चोट वह होती है जो कहे बिना दी जाती है।
- वो रिश्ता कैसा जिसमें मेरा दर्द उसके लिए सिर्फ़ शोर हो?
- जब वो ज़रूरत में होता था, तब मैं सबसे प्यारी थी।
- प्रेम में बराबरी न हो तो प्रेम एक तरफ़ा नौकरी बन जाता है।
- मैंने वफ़ा की बात की, उसने नफ़े-नुक़सान का हिसाब निकाला।
- उसके वादे इतने सुंदर थे कि मैं उसकी नीयत पढ़ना भूल गई।
- दिल के रिश्ते में जब मक़सद आ जाए, तो मोहब्बत बीमार पड़ने लगती है।
- जो इंसान सिर्फ़ मेरे अच्छे दिनों का साथी रहा, वो मेरा था ही नहीं।
- प्यार में जब हर बार मुझे ही मनाना पड़े, तो समझ लो रिश्ता थक चुका है।
- उसने मुझे सहारा कहा, पर जब मैं गिरा तो उसने हाथ खींच लिया।
- मतलबी इश्क़ की सबसे बड़ी सज़ा यह है कि उसमें दिल की ख़ाली जगह बचती है।
- अब मैं ऐसे प्यार से डरता हूँ जो बहुत जल्दी बहुत कुछ माँगे।
- उसने कहा “तुम बहुत ख़ास हो”, ख़ास सिर्फ़ तब तक जब तक काम का था।
- मैं उसे अपना घर समझा, वो मुझे बस एक पड़ाव समझता रहा।
- जिसने दिल का दरवाज़ा खटखटाया, उसने अंदर आकर सब कुछ अपने नाम कर लिया।
- रिश्ते में जब दिल से ज़्यादा दिमाग़ चलता है, तब सब हिसाब-किताब हो जाता है।
- उसकी बातों में मीठापन था, पर उन बातों में मेरे लिए जगह नहीं थी।
- प्यार का मतलब माँगना नहीं, देना है; वो यह समझ ही नहीं पाया।
- मैंने उसकी ख़ामोशी को प्यार समझा, पर वो उसकी बेपरवाही थी।
- रिश्ते का असली इम्तिहान ख़ुशी में नहीं, ग़म में होता है, और वो इसमें फ़ेल हुआ।
- जिसके लिए मैं पूरी दुनिया से लड़ी, वो मेरे लिए एक क़दम भी नहीं चला।
- मतलबी रिश्ता उस पतंग जैसा है जो तभी तक ऊँची रहती है जब तक डोर किसी और के हाथ में हो।
- उसके जाने का ग़म नहीं, उसकी असलियत जानने का ग़म ज़्यादा है।
- उसकी बेवफ़ाई ने मुझे इतना सिखाया जितना कोई किताब नहीं सिखा सकी।
- जो रिश्ता मुझे ख़ुद से दूर करे, उसे छोड़ना ही सही फ़ैसला है।
- अब प्यार से पहले मैं अपनी इज़्ज़त का सौदा नहीं करूँगा।
- मतलबी रिश्ते टूटकर भी एक एहसान कर जाते हैं, हमें हमारी अहमियत बता जाते हैं।
- जब मैंने ख़ुद से प्यार किया, तब जाना कि मुझे किसी की मेहरबानी की ज़रूरत नहीं।
अपने ही जब धोखा दें शायरी
सबसे गहरा ज़ख़्म वही होता है जो अपनों के हाथों मिलता है, क्योंकि हमने उन्हें अपने दिल तक पहुँचने का रास्ता ख़ुद दिया होता है। दुश्मन से लड़ना आसान है, पर अपनों के धोखे से उबरना बहुत मुश्किल। इस हिस्से की शायरी उसी टूटे भरोसे, उसी गहरी चुप्पी और उसी हिम्मत की कहानी है जिससे इंसान दोबारा खड़ा होता है। इन पंक्तियों में दर्द भी है और यह उम्मीद भी कि हर धोखा हमें पहले से ज़्यादा समझदार और मज़बूत बना देता है।
- दुश्मन की चोट सह ली, पर अपनों का धोखा सहा न गया।
- जिन पर आँख बंद करके भरोसा किया, उन्होंने ही आँखें खोल दीं।
- ग़ैरों से क्या शिकवा, जब अपनों ने ही पीठ में छुरा घोंपा।
- अपनों का दिया ज़ख़्म सबसे देर में भरता है।
- जिस हाथ को थामकर चला, उसी ने मुझे गिरा दिया।
- धोखा देने वाले वही निकले जिनके लिए मैं सब कुछ कर सकता था।
- अपनों ने जब साथ छोड़ा, तब ग़ैरों से भी उम्मीद टूट गई।
- जिन्हें मैंने अपनी ताक़त समझा था, वही मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी निकले।
- भरोसे की इमारत बरसों में बनती है, अपने उसे एक पल में गिरा देते हैं।
- अपनों की बेवफ़ाई ने मुझे इस क़दर तोड़ा कि जोड़ने में उम्र लग गई।
- जब अपने ही धोखा दें, तो आँसू भी चुपके से बहते हैं।
- जिसने मेरा सब कुछ जाना, उसी ने मेरे राज़ बेच दिए।
- अपने कहकर जिन्हें सीने से लगाया, वही सीने पर वार कर गए।
- मुझे ग़ैरों ने नहीं, अपनों ने बर्बाद किया है।
- जिनके लिए मैंने ख़ुद को कमज़ोर किया, वही मुझे ख़त्म करने निकले।
- अपनों का धोखा आत्मा पर वो निशान छोड़ता है जो वक़्त भी नहीं मिटा पाता।
- मैंने जिस जगह पर भरोसे की नींव रखी, वहीं से धोखे की दरार निकली।
- अपनों के बीच रहकर भी मैं हर बार अकेला पड़ गया।
- उनके चेहरों पर वही अपनापन था, बस दिल में कोई और ही रंग था।
- वो कहते रहे “हम साथ हैं”, और पीछे से रास्ता बंद करते रहे।
- धोखा देने वाला अपना हो तो दर्द दोगुना हो जाता है।
- जिनसे दुआओं की उम्मीद थी, उन्होंने बद्दुआओं का सामान दे दिया।
- मैंने अपनों को रोशनी दी, उन्होंने मेरे लिए अँधेरा चुना।
- अपनों से मिला सबक़ किसी भी स्कूल की किताब से ज़्यादा गहरा होता है।
- उनकी माफ़ी में भी अब मुझे सौदा नज़र आता है।
- अपनों के धोखे के बाद दुनिया पर यक़ीन करना सबसे मुश्किल हो जाता है।
- मैंने कभी नहीं सोचा था कि जो मेरी हँसी का कारण थे, वही मेरे आँसुओं की वजह बनेंगे।
- अपनों ने जब वक़्त पर मुँह मोड़ा, तब मैंने जाना कि मैं अपने साथ कितना अकेला था।
- जिन्हें मैंने हर बार माफ़ किया, उन्होंने इसे मेरी आदत समझ लिया।
- धोखे में सबसे बड़ी बात यह है कि वह उसी से मिलता है जिस पर सबसे ज़्यादा विश्वास हो।
- अपनों ने जब दिल तोड़ा, तब ख़ुद को जोड़ने का हुनर सीखा।
- अपने ही अगर दग़ा दें, तो ग़ैरों की दुनिया भी अपनी लगने लगती है।
- मैंने जिन पर अपनी जान लुटाई, उन्होंने मेरी जान की क़ीमत भी न समझी।
- जिन रिश्तों ने मुझे बनाया, वही मुझे मिटाने की कोशिश में लगे रहे।
- उनका धोखा इतना ख़ामोश था कि मुझे ख़बर तब हुई जब सब ख़त्म हो चुका था।
- अपनों की साज़िश के सामने मेरी सच्चाई हार जाती है, पर ज़मीर नहीं।
- जिन्हें अपना माना, उन्होंने अपनापन भी उधार का दिया।
- आँखों में आँखें डालकर झूठ बोलने वाले अपने ही निकले।
- वो जो मेरे सबसे क़रीब था, सबसे दूर निकला।
- अपनों के दिए धोखे ने मुझे हँसना तो सिखाया, पर दिल से हँसना भुला दिया।
- जिस दिन अपनों ने दग़ा दिया, उस दिन मैंने भरोसे का मतलब बदल दिया।
- जिनके ग़म में मैं रात भर जागा, वही मेरी ख़ुशी में सो गए।
- अपनों के घाव ऐसे होते हैं जो दिखते नहीं, पर रोज़ रुलाते हैं।
- मैंने दग़ा खाकर भी किसी को बद्दुआ नहीं दी, यही मेरी जीत है।
- धोखा खाकर भी जो मुस्कुरा दे, उसे वक़्त सबसे बड़ा हुनर सिखा देता है।
- जो अपनों से धोखा खाकर भी इंसान बना रहे, वही असल में बड़ा होता है।
- मैंने ख़ुद को समेटा, क्योंकि अपनों ने बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
- आज मैं तन्हा हूँ, पर कम से कम सच्चाई के साथ हूँ।
- जिन्होंने मुझे गिराया, उन्हीं के कारण मैंने उठना सीखा।
- अपनों से मिले ज़ख़्म को मैंने अपनी ताक़त बनाया, और अब मैं पहले से ज़्यादा मज़बूत हूँ।
Frequently asked question
1. मतलबी लोगों की पहचान कैसे करें?
जो सिर्फ़ ज़रूरत के वक़्त संपर्क करें, मुश्किल में बहाने बनाएँ और आपकी सफलता में ख़ुश न हों, वे अक्सर मतलबी होते हैं। इनके व्यवहार में लगातार एकतरफ़ापन दिखता है।
2. क्या हर बार मतलबी लोगों को माफ़ कर देना चाहिए?
माफ़ करना मन की शांति के लिए अच्छा है, पर बार-बार फ़ायदा उठाने देना ठीक नहीं। माफ़ करें, लेकिन सीमाएँ भी तय करें।
3. मतलबी दोस्त से दूरी बनाने का सही तरीक़ा क्या है?
बिना झगड़े के धीरे-धीरे अपना समय और ऊर्जा कम करें। ज़रूरत हो तो शांत शब्दों में अपनी बात कह दें, फिर अपनी सीमा पर टिके रहें।
4. अपनों के धोखे के बाद ख़ुद को कैसे सँभालें?
अपनी भावनाओं को स्वीकार करें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें, लिखें या शायरी के ज़रिए मन हल्का करें। ज़रूरत महसूस हो तो काउंसलर की मदद लें।
5. क्या यह शायरी सोशल मीडिया पर शेयर की जा सकती है?
हाँ, यह शायरी मौलिक रूप में लिखी गई है और स्टेटस, कैप्शन या स्टोरी के तौर पर शेयर की जा सकती है। बेहतर है कि इसे किसी को निशाना बनाने के बजाय अपने जज़्बात बयां करने के लिए इस्तेमाल करें।
Last Words
मतलबी लोग हमारी ज़िंदगी से जाकर हमें दर्द के साथ-साथ समझदारी भी दे जाते हैं। उनकी वजह से हम जान पाते हैं कि कौन दिल से हमारे साथ है और कौन सिर्फ़ ज़रूरत से। इसलिए शिकायतों में उलझने के बजाय अपने आत्मसम्मान को सँभालिए, सच्चे रिश्तों की क़द्र कीजिए और ख़ुद को इतना मज़बूत बनाइए कि किसी का आना-जाना आपको तोड़ न सके। उम्मीद है यह शायरी आपके जज़्बात को सही शब्द देगी।